व्यावसायिक शिक्षा पर शासन की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण

दिनांक: _14_ / 05 / 2026

स्थान: देहरादून

“व्यावसायिक शिक्षा पर शासन की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण”
255 व्यावसायिक लैब ठप, हजारों विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों का भविष्य संकट में

उत्तराखण्ड में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम को 31 मार्च 2026 को जारी विभागीय आदेश के माध्यम से आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया था। राज्य के 200 विद्यालयों की 255 व्यावसायिक शिक्षा लैब्स एवं 28 स्पोक विद्यालय इस निर्णय से सीधे प्रभावित हुए हैं। आश्चर्यजनक रूप से कई माह बीत जाने के बाद भी शासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा कोई स्पष्ट नीति, कार्ययोजना अथवा पुनः संचालन संबंधी आदेश जारी नहीं किया गया है।

इस निर्णय से राज्य के हजारों छात्र-छात्राओं की कौशल आधारित एवं रोजगारपरक शिक्षा पूरी तरह प्रभावित हो रही है। विद्यालयों में स्थापित लाखों रुपये की लैब एवं उपकरण धूल फांक रहे हैं, जबकि वर्षों से कार्यरत प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

प्रभावित प्रशिक्षकों एवं प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, सचिव विद्यालयी शिक्षा तथा समग्र शिक्षा विभाग को अनेक बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, किन्तु अब तक केवल आश्वासन ही प्राप्त हुए हैं। विभागीय निष्क्रियता एवं अनावश्यक विलंब से प्रभावित पक्षों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्रशिक्षकों ने कहा कि सरकार युवाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार एवं रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था को बिना किसी वैकल्पिक योजना के ठप कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ-साथ प्रशिक्षकों के जीवनयापन पर भी सीधा संकट उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य में वर्षों से विकसित की गई व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी तथा इसका सीधा नुकसान ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।

प्रभावित पक्षों ने सरकार से तत्काल निम्न मांगें की हैं:

• व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम को तत्काल पुनः प्रारंभ किया जाए।
• शासन स्तर से स्पष्ट नीति एवं दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
• प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
• विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।

प्रशिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, जनआंदोलन एवं माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं विभाग की होगी।

संपादक -रोहित निषाद

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