शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद भी 200+ व्यावसायिक प्रशिक्षक सड़कों पर; क्या आउटसोर्सिंग कंपनियों की कठपुतली बन गया है समग्र शिक्षा विभाग?”*

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

दिनांक: 07 अप्रैल 2026

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

 

*”शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद भी 200+ व्यावसायिक प्रशिक्षक सड़कों पर; क्या आउटसोर्सिंग कंपनियों की कठपुतली बन गया है समग्र शिक्षा विभाग?”*

 

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में पिछले 4 वर्षों से ‘समग्र शिक्षा’ के अंतर्गत व्यावसायिक शिक्षा की नींव मजबूत कर रहे 200 से अधिक व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) का भविष्य आज अंधकार में लटक गया है। 31 मार्च 2026 को आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘विजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ का टेंडर समाप्त होते ही, 1 अप्रैल से इन प्रशिक्षकों को बिना किसी पूर्व सूचना या सुरक्षा के कार्यमुक्त कर घर बैठा दिया गया है।

 

खोखले आश्वासन और जमीनी हकीकत:

हाल ही में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को बंद नहीं किया जाएगा। लेकिन इस बयान के 7 दिन बीत जाने के बाद भी धरातल पर स्थिति शून्य है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ, उत्तराखंड ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि शिक्षा बंद नहीं हो रही, तो इन अनुभवी प्रशिक्षकों को कार्यमुक्त कर बाहर का रास्ता क्यों दिखाया गया? विद्यालय से कार्यमुक्त होने के बाद भी बोर्ड मूल्यांकन में लगे प्रशिक्षकों ने कार्य जारी रखा और मूल्यांकन को पूर्ण किया।

 

सरकार और विभाग से व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ उत्तराखंड के कुछ सवाल:

1. पुनः नियुक्ति में देरी क्यों?: जब नवीन सत्र शुरू हो चुका है, तो 200+ अनुभवी प्रशिक्षकों को घर बैठाकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है? विभाग ने टेंडर खत्म होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?

2. विभाग की अक्षमता: क्या 4 साल बाद भी उत्तराखंड ‘समग्र शिक्षा विभाग’ की इतनी हैसियत नहीं है कि वह बिना किसी निजी बिचौलिए (VTP) के सीधे वोकेशनल कोर्सेज का संचालन कर सके? आखिर कब तक कमीशनखोरी के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे व्यावसायिक शिक्षा को छोड़ा जाएगा?

3. मजदूर से भी कम वेतन: 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों का भविष्य संवारने वाले इन ट्रेनर्स का वेतन एक अकुशल मजदूर के न्यूनतम मानदेय से भी कम है। क्या एक राज्य के लिए यह शर्मनाक नहीं है कि उसके ट्रेनर्स अल्प वेतन में जीवन यापन करने को मजबूर हैं?

4. अनुभव का शून्य मोल: 4 साल तक निष्ठापूर्वक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने के बाद, इन ट्रेनर्स को “इस्तेमाल करो और फैंक दो” (Use and Throw) की नीति के तहत बाहर कर देना कहाँ का न्याय है?

5. शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने अपने बयान में कह तो दिया कि पुरानी कंपनी ही नया टेंडर होने तक व्यावसायिक शिक्षा को चलाएगी लेकिन अभी तक पुनः नियुक्ति का कोई आदेश नहीं निकला है. क्यों?

 

व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ उत्तराखंड ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 48 घंटों के भीतर पुनः नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता और विभाग सीधे मानदेय भुगतान या ठोस नीति पर निर्णय नहीं लेता, तो प्रदेश भर के व्यावसायिक प्रशिक्षक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

> “हम केवल आश्वासन नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। शिक्षा मंत्री जी बताएं कि क्या आपके विभाग के लिए ‘कौशल विकास’ केवल कागजों पर है? एक तरफ आप बेरोजगारी दूर करने की बात करते हैं, दूसरी तरफ कार्यरत युवाओं को बेरोजगार कर रहे हैं।”

> — प्रवक्ता, व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ, उत्तराखंड

केंद्र सरकार जहां NEP नई शिक्षा नीति के अंतर्गत व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देती है, लेकिन वर्तमान में उत्तराखंड में इसे चलाने वाले प्रशिक्षक ही बेरोजगार हैं।

पहली किरण न्यूज़ 24X7

रोहित निषाद (संपादक )

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