दिनांक: 30 अप्रैल 2026
स्थान: देहरादून,
7 दिन का संघर्ष – सरकार अब भी मौन, व्यावसायिक प्रशिक्षकों का धैर्य जवाब के करीब
आज व्यावसायिक प्रशिक्षकों के धरने को पूरे 7 दिन हो चुके हैं। सात दिन की तपती धूप, ठंडी रातें और लगातार संघर्ष के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह चुप्पी अब सवाल बन चुकी है—क्या प्रशिक्षकों की आवाज़ इतनी कमजोर है या फिर उसे जानबूझकर दबाया जा रहा है?
धरना स्थल पर बैठे हर प्रशिक्षक की आंखों में उम्मीद है, लेकिन दिल में बढ़ती नाराज़गी भी साफ दिखाई दे रही है। वे बार-बार एक ही बात दोहरा रहे हैं—
“हमें हमारा हक चाहिए, हमारा सम्मान चाहिए!”
यह आंदोलन अब सिर्फ मांगों का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह आत्मसम्मान, भविष्य और अधिकारों की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।
अगर अब भी सरकार ने संज्ञान नहीं लिया, तो यह शांत धरना एक बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है।
इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की निष्क्रियता पर होगी।
धरना स्थल से उठ रही आवाज़ें अब चेतावनी बन चुकी हैं—
“संघर्ष जारी रहेगा, जब तक न्याय नहीं मिलेगा!”
सरकार से स्पष्ट संदेश:
समय निकलता जा रहा है। अब निर्णय लीजिए—संवाद और समाधान का, या फिर बढ़ते आंदोलन का।
“ना थकेंगे, ना रुकेंगे — अपने हक के लिए डटकर लड़ेंगे!”
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ






