दिनांक: 28 अप्रैल 2026
स्थान: देहरादून
“खामोशी टूटी — हक की हुंकार अब विधान सभा तक”

पांच दिनों से धरना-हड़ताल पर बैठे व्यावसायिक प्रशिक्षकों का धैर्य आज संकल्प में बदल गया। शांत बैठे ये लोग आज सड़कों पर थे — क्योंकि जब अधिकार अनसुने रह जाएं, तो आवाज़ खुद रास्ता बना लेती है।
आज विधान सभा की ओर बढ़ते हर कदम के साथ एक ही संदेश गूंज रहा था —
अब नहीं रुकेंगे… अब नहीं झुकेंगे…
इस संघर्ष में संगठन के नेतृत्व —
अध्यक्ष तुषार पांडेय, प्रवक्ता इंद्रेश रावत, सचिव सुमित सेमवाल,
साथ ही साक्षी सैनी, नीलम अंतवाल, पवन थपलियाल, सपना, निशा रतूड़ी, कविता नेगी और सैकड़ों प्रशिक्षकों की एकजुटता ने आंदोलन को नई ताकत दी।
गूंजते नारे —
“Vocational Trainer Association — जिंदाबाद! जिंदाबाद!”
“हम हमारा हक मांगते — नहीं किसी से भीख मांगते!”
“ लेकर रहेंगे — चाहे जो भी करना पड़े!”
यह सिर्फ मांगों का कागज नहीं,
यह हर उस प्रशिक्षक की कहानी है जो सम्मान चाहता है,
जो सुरक्षा चाहता है,
जो अपने भविष्य को अनिश्चितता में नहीं छोड़ना चाहता।
प्रमुख मांगें:
• पुनर्बहाली — अपने मूल स्थान पर
• सम्मानजनक वेतन + हर वर्ष 10% वृद्धि
• 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा
• महंगाई भत्ता (DA) सहित पूर्ण मानदेय
प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी —
अगर अब भी उनकी आवाज़ विधान सभा में नहीं गूंजी,
तो यह आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं रहेगा…
बल्कि एक बड़ा जनआंदोलन बन जाएगा।





